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किरण और दर्जी की प्रेम खुदाई

किरण और दर्जी की प्रेम खुदाई—>शाम की धुंधलकी रोशनी समीर की छोटी सी दुकान के पुराने लकड़ी के दरवाजों से छनकर अंदर आ रही थी, जहाँ कपड़ों के थान और धागों की रीलें एक अनकही कहानी बुन रही थीं। किरण जब पहली बार उस दुकान में दाखिल हुई, तो उसकी पायलों की झंकार ने कमरे … Read more

मीरा भाभी की खुदाई

मीरा भाभी की खुदाई—> बारिश की वह शाम बहुत ही बोझिल और ठंडी थी, जब समीर ने मीरा भाभी को बरामदे में अकेले बैठे देखा। मीरा के चेहरे पर एक ऐसी उदासी थी जिसे शायद घर का कोई और सदस्य न पढ़ पाता, लेकिन समीर की पारखी आँखों ने हमेशा उनकी हर खामोशी और अनकही … Read more

कविताओं वाली मौसी की प्रेम खुदाई

समीर जब वर्षों बाद अपनी कविता मौसी के पुराने पुश्तैनी घर पहुँचा, तो मानसून की पहली बारिश ने मिट्टी की सोंधी खुशबू से पूरे वातावरण को सराबोर कर दिया था। मौसी का व्यक्तित्व हमेशा से ही शांत और गरिमामय रहा था, लेकिन आज उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक और चेहरे पर एक ठहराव … Read more

नेहा और पुरानी खुदाई

नेहा और पुरानी खुदाई—> समीर ने जब सालों बाद नेहा को उस पुराने पुश्तैनी हवेली के सामने खड़ा देखा, तो उसके दिल की धड़कनें एक पल के लिए थम सी गईं। नेहा की सादगी में भी एक ऐसी कशिश थी जो समीर को अपनी ओर खींच रही थी। उसकी रेशमी साड़ी का गहरा नीला रंग … Read more

समीर और सानिया की यादों की खुदाई

समीर और सानिया की यादों की खुदाई—> समीर सालों बाद अपने पुश्तैनी गाँव वापस लौटा था, जहाँ की मिट्टी की सौंधी महक में आज भी उसकी बचपन की यादें कहीं गहराई में दबी हुई थीं। धूप की सुनहरी किरणें पुराने बरगद के पेड़ों से छनकर नीचे आ रही थीं, और हवाओं में एक अजीब सी … Read more

रीना भाभी और जज्बातों की खुदाई

गर्मी की वह एक बोझिल और शांत दोपहर थी, जब सूरज की किरणें आंगन के पुराने बरगद के पेड़ों से छनकर नीचे की ज़मीन पर अजीब सी आकृतियां बना रही थीं। समीर अपने शहर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से दूर कुछ दिन अपनी भाभी रीना के पास गाँव के इस पुश्तैनी मकान में शांति खोजने … Read more

दोस्त स्नेहा की खुदाई

दोस्त स्नेहा की खुदाई—> गाँव की उस पुरानी हवेली की दीवारों से आज भी मिट्टी की वह सोंधी खुशबू आ रही थी, जो बरसों पहले स्नेहा और रोहन के बचपन की गवाह थी। स्नेहा, जो अब एक शहर की आधुनिक युवती बन चुकी थी, अपनी पुश्तैनी हवेली की मरम्मत और उसके आँगन की खुदाई के … Read more

सीमा मौसी के मन की खुदाई

सीमा मौसी के मन की खुदाई—>गर्मियों की उन लंबी और सुनहरी दोपहरों में जब पूरा गाँव गहरी नींद में सो जाता था, केवल मैं और सीमा मौसी ही छत की ठंडी मुंडेर के नीचे बैठकर पुराने किस्सों को याद किया करते थे। सीमा मौसी, जो उम्र के उस पड़ाव पर थीं जहाँ परिपक्वता और सौंदर्य … Read more

सुहानी की यादों की खुदाई

बरसों बाद जब मैं अपने पुश्तैनी गाँव की उन पगडंडियों पर वापस लौटा, तो मिट्टी की वह सोंधी खुशबू आज भी वैसी ही थी, जैसे मेरे बचपन के दिनों में हुआ करती थी। पुरानी हवेली के आँगन में खड़ा मैं अतीत के झरोखों में झाँक ही रहा था कि तभी मेरी नज़र पड़ोस के बगीचे … Read more

पड़ोसन मेघना की खुदाई

दोपहर की वह सुनहरी धूप जब आंगन के कोने में लगे पुराने नीम के पेड़ की झुर्रियों से छनकर नीचे आ रही थी, तो पूरा वातावरण एक अजीब सी शांति और गर्माहट से भर गया था। मेरी पड़ोसन मेघना, जो हमेशा अपनी शालीनता और सौम्य स्वभाव के लिए जानी जाती थी, आज अपने बगीचे की … Read more

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